Pradhan, Rajesh Kumar and Dash, Gyanaranjan and Dash, Swatipriyanka Sen and Dash, Biswajit and Das, Madhumita and Ghosh, Shubhadeep and Madhu, K (2023) ओडीषा के जनजातीय और अनुसूचित जाति के मछुआरों का सामाजिक-आर्थिक उत्थानः तटीय खारे तालाबों में ब्लैक टाइगर चिंगट के साथ ग्रे मल्लेट के पॉली-कल्चर पालन तकनीकों के प्रदर्शन के माध्यम से आजीविका सहायता सह कौशल विकास पहल. मत्स्यगंधा : भा कृ अनु प - केंद्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान की अर्थ वार्षिक राजभाषा गृह पत्रिका Matsyagandha, 13. pp. 16-20.
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Text
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Abstract
भारत के तटींग राज्य ओडीषा में 22.8% जनजातियों है जी देश की 86% जनजातीय आबादी से काफी अधिक (www.censusindia.gov.in)। बालासोर, ओडीषा का उत्तरी तटीय जिला है जो मात्स्यिकी और जलजीव पालन शक्यता से समृद्ध है। इस जिले में अनुसूचित जनजाति समुदाय का प्रतिशत लगभग 12.4% है और ये सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग हैं। इस जिले के पारंपरिक जनजातीय मछुआरे ज्यादातर बगाल की खाड़ी के तटींग क्षेत्रों में छोटे पैमाने पर मछली पकड़ने की गतिविधियों में लगे हुए हैं। उनमें से बहुत कम के पास पारंपरिक देशी जलयान है जिनका उपयोग वे सुबणरंखा मुहाने और आस-पास के क्षेत्रों में क्लोम जाल (गिल नेट) और स्थूण जाल (स्टेक नेट) मत्स्यन के लिए करते हैं, और कई आदिवासी मछुआरे अन्य मत्स्थन जलयान पर चालक दल के रूप में काम करते हैं। परिवार की महिलाएँ ज्यादातर मछली पकड़ने और उससे जुड़ी गतिविधियों में लगी रहती है,
| Item Type: | Article |
|---|---|
| Subjects: | Socio Economics and Extension Socio Economics and Extension > Fishing Community |
| Divisions: | CMFRI-Puri FC |
| Depositing User: | Arun Surendran |
| Date Deposited: | 29 Jan 2026 04:27 |
| Last Modified: | 29 Jan 2026 04:27 |
| URI: | http://eprints.cmfri.org.in/id/eprint/19519 |
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