प्रकृति का सीमेंटः माजाली और तालपोना समुद्र तटों पर सैंडकैसल वर्म्स द्वारा निर्मित जैवजनित मधुमक्खी-छत्ता जैसी रीफ संरचनाओं की नई उपस्थिति

Ramudu, Kurva Raghu and Hussain, Tanveer and Mahendran, V and Harijan, Tarunkumar V and Pal, Mahendra and Thomas Mathew, Kiran and Dube, Praveen and Sonali, S M and Sharma, S R Krupesha and Imelda, Joseph and Kalidas, C (2026) प्रकृति का सीमेंटः माजाली और तालपोना समुद्र तटों पर सैंडकैसल वर्म्स द्वारा निर्मित जैवजनित मधुमक्खी-छत्ता जैसी रीफ संरचनाओं की नई उपस्थिति. In: Abstract Book: ‘Fish Biodiversity: Management and Sustainable Utilization’, National Scientific Hindi Seminar-cum-Workshop, 12 May 2026. ICAR-National Bureau of Fish Genetic Resources, Lucknow, p. 41. ISBN 978-81-995743-5-9

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Abstract

जनवरी 2026 में किए गए एक तटीय क्षेत्रीय सर्वेक्षण के दौरान कर्नाटक के माजाली समुद्र तट (14°53'53.9″N, 74°05'44.4"E) तथा गोवा के तालपोना समुद्र तट (14°58′25.1"N, 74°02'35.5"E) पर मधुमक्खी के छत्ते जैसी जैवजनित रीफ संरचनाएँ दर्ज की गईं, जिनका पूर्व में इन स्थानों पर कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं था। इन संरचनाओं की पहचान सेबेलैरिड (कुल Sabellariidae) पॉलीकीट रीफ के रूप में की गई, जिन्हें सामान्यतः सैंडकैसल या हनीकॉम्ब वर्म रीफ कहा जाता है। ये संरचनाएँ ज्वारीय क्षेत्र में कई मीटर तक सतत विस्तृत षट्‌कोणीय रेत-नलिकाओं के सघन समूहों के रूप में पाई गईं। प्रत्येक नलिका एकल कृमि द्वारा स्थानीय रेत कणों और शंख-खोल के टुकड़ों को प्रोटीन-आधारित जैव-चिपक पदार्थ से जोड़कर निर्मित की जाती है, जो सामूहिक रूप से एक कठोर त्रि-आयामी संरचना का निर्माण करती है। अवसाद का रंग एवं बनावट रीफ की संरचना में परिलक्षित हुए, जिनका रंग हल्के भूरे से धूसर तक था, जो स्थल-विशिष्ट खनिज संरचना के अनुरूप था। पूर्व सर्वेक्षणों में अनुपस्थित इन रीफों का अचानक प्रकट होना हालिया उपनिवेशन घटना का संकेत देता है, जो संभवतः अवसाद प्रवाह में परिवर्तन, जल-गतिकीय परिस्थितियों में बदलाव, या अनुकूल समुद्रीय परिस्थितियों से संबंधित लार्वा भर्ती में वृद्धि के कारण हुआ हो। दोनों अध्ययन स्थलों की भौतिक विशेषताएँ भिन्न हैं: माजाली समुद्र तट एक खुला, उच्च ऊर्जा वाला रेतीला तट है जहाँ प्रचुर अवसाद उपलब्ध है, जबकि तालपोना समुद्र तट अपेक्षाकृत कम व्यवधान वाला तंत्र है, जहाँ रेतीले तथा कठोर आधार मिश्रित रूप में उपस्थित हैं, जो लार्वा के स्थिरीकरण में सहायक हैं। पारिस्थितिक दृष्टि से, ये सेबेलैरिड रीफ उच्च ऊर्जा तटीय पर्यावरण में पारिस्थितिकी अभियांत्रिकी (इकोसिस्टम इंजीनियरिंग) का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। ढीले अवसादों को स्थिर जैवजनित संरचनाओं में परिवर्तित कर ये कृमि नए कठोर आधार निर्मित करते हैं, जिससे आवासीय विषमता और संरचनात्मक जटिलता में वृद्धि होती है। ये रीफ निवास करने वाले कृमियों को यांत्रिक सुरक्षा प्रदान करती हैं, ज्वार आने पर निलंबित आहार ग्रहण (सस्पेंशन फीडिंग) को सुगम बनाती हैं तथा भाटा के समय निर्जलीकरण तनाव को कम करती हैं। इसके अतिरिक्त, ये जैव-विविधता के हॉटस्पॉट के रूप में कार्य करती हैं, जहाँ अंतःस्थानीय स्थानों में क्रस्टेशियन, मोलस्क, स्पंज, ब्रायोज़ोआ तथा किशोर मछलियों को आश्रय मिलता है। जैविक अंतःक्रियाओं से परे, ये रीफ तरंग ऊर्जा का अपव्यय कर तथा अवसाद अपरदन को कम कर तटीय स्थिरीकरण में भी योगदान देती हैं। माजाली और तालपोना तटरेखाओं पर सेबेलैरिड रीफों की स्थापना का प्रलेखन भारत के मध्य पश्चिमी तट पर एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक विकास को रेखांकित करता है। ये जीवित संरचनाएँ अंतर-ज्वारीय पारितंत्रों की गतिशील और प्रत्युत्तरशील प्रकृति को उजागर करती हैं, जहाँ सूक्ष्म अकशेरुकी जीव बड़े पैमाने पर भू-आकृतिक और पारिस्थितिक परिवर्तन उत्पन्न कर सकते हैं। बदलती तटीय परिस्थितियों के संदर्भ में इनकी स्थायित्व, पारिस्थितिक अनुक्रमण तथा तटरेखा की सहनशीलता में संभावित भूमिका का आकलन करने हेतु सतत निगरानी आवश्यक है।

Item Type: Book Section
Subjects: Marine Ecosystems > Coral Reefs
Marine Ecosystems
Divisions: CMFRI-Karwar
Depositing User: Arun Surendran
Date Deposited: 20 Aug 2026 05:07
Last Modified: 20 Aug 2026 05:49
URI: http://eprints.cmfri.org.in/id/eprint/19906

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